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om and Temple of Shiva – ॐ – ओम और शिव मंदिर

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ॐ om and Temple of Shiva

यह भक्ति, ज्ञान की कमी, निर्दोष दिमाग और लोगों की आध्यात्मिक गरीबी, की एक कहानी है| हम कहाँ खड़े हैं?

एक गाँव में ॐ और भगवान शिव का मंदिर था, एक सच्ची कहानी जो एक दोस्त ने उनके अनुभवों के आधार पर सुनाई थी।

एक ईमानदार व्यक्ति ने अपने इलाके में भगवान शिव का एक मंदिर बनाया। जैसा कि माना जाता है, दैनिक पूजा और प्रक्रियाओं का पालन करने के लिए।

मंदिर के आसपास के सभी लोग ईश्वरीय वातावरण के कारण खुश थे। उनमे से कई आगंतुक और उपासक थे।

ॐ om and Temple of Shiva

ॐ and Temple of Shiva

  • सबसे आश्चर्यजनक बात यह थी कि
  • आगंतुकों या भक्तों ने ईमानदार व्यक्ति से बात की थी …,
  • भगवान शिव सामान्य रूप से अपने मूल प्रतीकात्मक रूप में थे,

जैसे कि लिंग और उसके पीछे ॐ का धातु प्रतीक था। दोनों प्रतीकों को बहुत अच्छी तरह से सजाया गया था।

आगंतुक की आपत्ति यह थी कि वे दोनों या केवल एक के लिए सम्मान दिखाते हैं। मंदिर शिव का था, फिर क्या ॐ का प्रतीक वहां होना चाहिए।

  • उन्होंने कहा, वे उलझन में हैं,
  • किसकी पूजा करना है?
  • और उन्होंने सबसे अनुरोध किया कि
  • मंदिर से ॐ के सिंबल को हटा दिया जाना चाहिए।

पवित्र व्यक्ति ने यह बताने की कोशिश की कि ॐ ही सबकुछ है और दोनों प्रतीकात्मक हैं। उन्होंने ॐ के प्रतीक को हटाने से इंकार कर दिया।

ॐ om and Temple of Shiva

 

ॐ om and Temple of Shiva

ॐ om and Temple of Shiva

जहां हम धर्म, भगवान और ॐ या ओम के ज्ञान के बारे में जानते हैं? कृपया मुझे समझने में मदद करें। कौन बड़ा है?

यह आगन्तुक के लिए बहस का मुद्दा था जो शायद निरर्थक ही था क्योंकि इससे कुछ हासिल नहीं होना था|

प्रतीक में ही जिसको अंतर नजर आने लगे वो क्या भक्ति करेगा | असल में भक्ति और भावना का मेल होने पर ही हम कुछ पा सकते है |

  • ॐ प्राथमिक और अविनाशी शब्द है
  • जिसका जाप स्वयं सम्भु भी करते है |
  • यकीनन ॐ प्रारब्ध है ॐ अनंत भी है |

अब उस इमानदार व्यक्ति ने कहा बड़ा प्रतीक नहीं होता बड़ी भावना होती है क्योंकि एक नास्तिक के लिए प्रतीक का कोई मूल्य नहीं होता | पर उसकी भावना अटल होती है |

इसी तरह एक आस्तिक को हर चीज में ईश्वर का साक्षात्कार हो जाता है उसको हर कण में ईश्वर की उपस्तिथि नजर आती है |

  • अब वह आगन्तुक हडबडा गया
  • और बोला मैं सिर्फ shiv का भक्त हूँ
  • उनके अलावा किसी को सम्मान नहीं दे सकता |

ॐ om and Temple of Shiva

om and Temple of Shiva

ॐ om and Temple of Shiva

तब इमानदार आदमी ने कहा सम्मान हमे सबका करना चाहिए, भले ही हम किसी भगवान में आस्था रखता हो |

क्या हम अपने माता पिता, और बडो का सम्मान नहीं करते या हमे यह सोचना चाहिए कि अमुक मेरे माता पिता है उनके सिवा मैं किसी का सम्मान नहीं कर सकता |

आप भक्त वाली कोई बात नहीं कर रहे हो बल्कि एक काफ़िर जैसे संकेत दे रहे हो क्योंकि जीवमात्र का भला चाहने वाला असली भक्त है|

  • अब उस व्यक्ति ने क्षमा मांगनी चाही तो
  • इमानदार व्यक्ति ने कहा आत्मा सो परमात्मा!
  • जीव आत्मा भी परमात्मा का ही अंश है |

यह उसी में से निकलकर आती है और अंत में उसी में विलीन हो जाती है इसमें कोई संशय नहीं होना चाहिए |

  • लिंग और ॐ का धातु का प्रतीक
  • इन्सान द्वारा बनाया एक निर्जीव प्रतीक है
  • जिन्हें हम सिर्फ प्रतीक के तौर पर भगवान जानकर पूजा करते है |
  • जबकि जीव इश्वर द्वारा निर्मित है
  • यानि सब जीवात्मा उसकी औलाद है
  • जीव के शरीर में आत्मा धडकती है
  • जबकि हम उसे तो दुत्कार देते है |

om and Temple of Shiva

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