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शिव बाघ की खाल क्यों पहनते है?

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Why Shiva Wears A Tiger Skin?

हिंदू धर्म की सबसे अच्छी छवियों में से एक छवि भगवान शिव की वह तस्वीर है, जिसमे वह बाघ की त्वचा पर बैठे है।

यह एक सर्वोच्य लोकप्रिय छवि है कि वह बाघ की त्वचा पहने है या उनके चारों ओर बाघ की त्वचा लिपटे हुए है।

शिव के साथ गणों की सेना

 

राजसी बाघ की त्वचा शिव की पशु शक्ति पर संकेत देती है, जो इस देवता से गूढ़ लिपट आभा जोड़ती है, जो हिंदू पवित्र त्रिदेव का एक तिहाई हिस्सा बनती है।

लेकिन शिव पुराण में एक दिलचस्प कहानी है जो बताती है कि कैसे शिव ने बाघ की त्वचा पर बैठने के साथ-साथ इसे पहनने का फैसला क्यों किया ?

एक बार भगवान शिव एक ऋषि के आश्रम का दौरा करते हैं | शिव पुराण के अनुसार, इससे पहले शिव दुनिया भर में नंगे शरीर के साथ घूमते थे।

एक बार वह एक ऐसे जंगल पहुंचा जहाँ कई शक्तिशाली ऋषियों (हर्मिट्स) का घर था। ऋषि अपनी पत्नियों के साथ अपने आश्रम में रहते थे |

जब शिव नंगे शरीर उस जंगल तक जा पहुचे जहाँ ऋषि दल की पत्नियाँ क्रीडा कर रही थी तो मुनी ने शिव को एक सबक सिखाने का फैसला किया

जब संतों को इस सच्चाई का अहसास हुआ कि उनकी पत्नियों की जवान उम्र है जबकि सभी ऋषि उनसे दुगनी उम्र के बूढ़े है |

जवान उम्र की मदमस्त भावना के कारण, उनकी पत्नियाँ कोई कामुक हरकत न कर दे, क्योंकि नंगे शरीर वाले शिव भी जवान थे, तो वे उन्हें सबक सिखाने का फैसला करते है!

Why Shiva Wears A Tiger Skin?

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शिव बाघ की खाल क्यों पहनते है?

 

फिर ऋषियों का झुण्ड एक विशाल गड्ढा खोदता है जो शिव के दैनिक जाने के रास्ते पर पड़ता है। जब शिव गड्ढे वाले स्थान पर आया, तो मुनी कुछ कदम आगे चले गए और गड्ढे से एक बाघ बाहर आया |

शिव द्वारा बाघ की खाल उतारना

बिना किसी भी कठिनाई के, शिव बाघ को मार देता है। जीत की ख़ुशी में, शिव ने अपने शरीर पर बाघ की त्वचा को लपेट लिया |

Shiva Tears The Tiger Apart

कोई साधारण आदमी नहीं

ऋषि इस प्रकार महसूस करते हैं कि उनके आश्रम के आगंतुक कोई साधारण ऋषि नहीं थे बल्कि एक देवता थे। वे उनकी सच्ची शक्तियों के बारे में पता चलने पर उनके पैरों पर गिरते हैं |

प्रतीकात्मक महत्व

उस प्रकरण के बाद, शिव ने बाघ की त्वचा पहनना जारी रखा, जिसने न केवल एक क्रूर जानवर पर विजय प्राप्त की बल्कि तीनों लोकों में उनकी शक्ति का प्रतीक बन गया|

Why Shiva Wears A Tiger Skin?

 

Why Shiva Wears A Tiger Skin?

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बाघ प्रतीक

बाघ प्रतीक का न केवल शिव से संबंध है बल्कि हिंदू पौराणिक कथाओं में देवी की आकृति के साथ भी दिखाई देता है।

दरअसल, महिषासुरमर्दनी – देवी जिसने दानव महिषासुर को पराजित किया- वह हमेशा बाघ को सवार रहती है |

पूर्वी जुनून

चीनी लोककथाओं में एक भाग्यशाली जानवर माना जाता है, बाघ चीनी दवा में प्रयोग किया जाता है और चीनी कला का विषय भी है |

प्राचीन सभ्यता

बाघ हड़प्पा कला और मुद्रा में एक आदर्श चिह्न भी है, इस तथ्य ने यह साबित कर दिया है कि यह हमेशा के लिए एक शक्ति का प्रतीक था |

Why Shiva Wears A Tiger Skin?

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Why Shiva Wears A Tiger Skin?

 

प्राचीन योधेय गणराज्यों में भी बाघ बल का प्रतीक था, ये प्रजातंत्रीय गणराज्य जाटों के शक्तिशाली राज्य थे जो सिन्धु नदी से लेकर इलाहाबाद तक फैले थे |

आज यही गणराज्य जाटों की खापों में मौजूद है जो दिल्ली के चारों तरफ लगभग 450 किलोमीटर के क्षेत्र में फैली हुई है |

पंजाब में सिख धर्म का प्रभाव होने और अधिकतर जाट समुदाय का इसमें शामिल होने पर आजकल इन खापों को पंजाब में जत्थे के रूप में जाना जाता है |

जबकि पाकिस्तान में मुस्लिम धर्मी जाटों की शक्तिशाली संघो को आज जई (खाप) के नाम से जाना जाता है |

जैसे काकडजेई खाप खोखर गोत्र के जाटों की है | गिलजेई गिल गोत्री जाटों की जबकि जोहियावार जोहिया गोत्र और बलूचिस्तान की खाप बल (बाल्यान) जाट गोत्र की है |

असल में यह खाप यौधेय गणों का ही बदला हुआ रूप है शिवजी के प्रथम गण के रूप में (तलखापुर) हरिद्वार के जाट राजा वीरभद्र थे |

हरिद्वार से ऋषिकेश जाते समय वीरभद्र नामक रेलवे स्टेशन है जो इसी जाट राजा के नाम पर बना है जबकि उसके किले पर भारत सर्कार ने दवाइयों का कारखाना लगा दिया था जिसे हम आज IDPL कहते है |

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टाइगर हंट्स

बाघ का शिकार करना प्राचीन भारत के महाराजाओं के साथ विशेषाधिकार का विषय बन गया था, और बाद में ब्रिटिश शासकों द्वारा अपनाया जाने वाला एक अभ्यास |

पशु प्रवर्ती पर दिव्य जीत

अंत में, भगवान शिव – पवित्र त्रिदेव में विनाशक – एक मरे हुए बाघ त्वचा पर बैठता है ताकि पशु प्रवृत्तियों पर दिव्य बल की जीत का संदेश दिया जा सके |

जय हो भोलेनाथ

Why Shiva Wears A Tiger Skin?

पढने के लिए धन्यवाद 

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